Ustad Bismillah Khan Yuva Puraskar: कौन है मनोज मिश्रा जिन्हें केंद्रीय मंत्री ने किया सम्मानित.

जीवन मे प्रकाश का बड़ा महत्व है, यह सर्व ज्ञात तथ्य है । इसी बात को चरितार्थ करते हुए कला के क्षेत्र में रीवा के मनोज मिश्रा ने किया कमाल । बेस्ट लाइट डिजाइनर के रूप हुए पुरस्कृत । रीवा से यह अवार्ड पाने बाले पहले व्यक्ति। प्रधानमंत्री से मिली बधाई ।

Ustad Bismillah Khan Yuva Puraskar: कौन है मनोज मिश्रा जिन्हें केंद्रीय मंत्री ने किया सम्मानित.
केंद्रीय मंत्री के साथ मनोज मिश्रा

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार: कौन हैं मनोज शर्मा जिन्हें केंद्रीय मंत्री ने सम्मानित किया?

यह सर्वविदित तथ्य है कि जीवन में प्रकाश का बहुत महत्व है। इसी बात को सच साबित करते हुए रीवा के मनोज मिश्रा ने कला के क्षेत्र में बहुत अच्छा काम किया है। इन्हें सर्वश्रेष्ठ प्रकाश डिज़ाइनर के रूप में सम्मानित किया गया। रीवा से यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रथम व्यक्ति हैं। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर दी बधाई।


मनोज मिश्रा ने देश भर में प्रतिष्ठित "उस्ताद विस्मिल्लाह खा अवार्ड" प्राप्त कर पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। 15 फरवरी को कला के क्षेत्र में विशेष कार्य के लिए उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार से मनोज कुमार मिश्रा सम्मानित हुए । यह पुरस्कार मेघदूत मुक्ताकाशी मंच, ललित कला अकादमी, नई दिल्ली में, थिएटर पर लाइट डिजाइन के लिए भारत सरकार के संस्कृति और पर्यटन मंत्री जी. किशन रेड्डी द्वारा रीवा मध्यप्रदेश के मनोज कुमार मिश्रा को प्रदान किया गया ।

प्रशिक्षु से प्रशिक्षक तक मनोज मिश्रा -: 

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार: उन्हें बचपन से ही रंगमंच और कला से बेहद लगाव था। मनोज कुमार मिश्रा की रंग यात्रा स्कूल के दिनों में एक छोटे से नाटक के साथ शुरू हुई और कॉलेज के युवा उत्सव तक जारी रही । हुआ यूं कि सैन्य विज्ञान के छात्र कला के क्षेत्र में दक्ष होने लगे। एक दौर आया जब उन्होंने कानून की पढ़ाई शुरू की, इन सबके बीच थिएटर की औपचारिक शुरुआत साल 1999 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, नई दिल्ली की नाट्य कार्यशाला से हुई। यह कार्यशाला रीवा में हुई। इससे उन्हें रंगमंच के बारे में विस्तार से जानकारी मिली। यहीं मनोज मिश्रा के अभिनय और निर्देशन का सफर शुरू हुआ। मण्डप आर्ट के सचिव विनोद मिश्र बताते हैं कि हमारे निर्देशक मनोज मिश्रा,  नाट्य विधा के विभिन्न पहलुओं को समझते हुए । कार्य कर रहे थे इसी दौरान यह अनुभव हुआ कि रंग मंच में प्रकाश का विशेष महत्व है। इसे बेहतर सीखने और  प्रदर्शन करने की जरूरत है। इसी बीच नट-बुंदेले भोपाल में कार्य अनुभव श्रेष्ठ रहा । यहीं से मनोज मिश्रा का चयन प्रतिष्ठित भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ में  हुआ ।  मनोज मिश्रा ने यहां दो साल का अभिनय प्रशिक्षण प्राप्त कियाअपनी प्रतिभा को और निखारा। नतीजतन, उन्हें एक साल की इंटर्नशिप भी मिली। अब तक आप प्रकाश व्यवस्था के ज्ञान में पारंगत हो चुके थे। प्रकाश व्यवस्था के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद, उन्होंने अपने ज्ञान के प्रकाश को पूरे देश में पहुँचाया। देश में लोगों को पता चला कि मनोज मिश्रा के रूप में कला जगत को एक  विशेषज्ञ मिल गया है।


नए कलाकारों की पौध -:

मनोज मिश्रा ने अपने कार्य अनुभव का उपयोग करते हुए नए छात्रों को प्रशिक्षित करने के लिए कई कार्यशालाएँ शुरू कीं। साथ ही उन्हें नाट्य विद्यालयों में अतिथि प्रशिक्षक के रूप में आमंत्रित किया जाने लगा। देश भर से बुलाए जाने के बाद भी उन्होंने अपनी जन्मभूमि के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन किया। मंडप सांस्कृतिक शिक्षा कला केंद्र (मंडप आर्ट) के साथ मिलकर इन्होंने युवा पीढ़ी को रंगमंच की बारीकियों से परिचित कराना शुरू किया। इस दौरान मनोज मिश्रा ने अपने कुशल प्रशिक्षण से 100 से अधिक कलाकारों की एक मजबूत टीम बनाई, वर्तमान में ये कलाकार देश के विभिन्न क्षेत्रों में अपने कौशल का परिचय दे रहे हैं। 


भारतेंदु नाट्य अकादमी से गहरा नाता-:

भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ यहां से प्रशिक्षित अभिनेता फिल्म, टेलीविजन आदि में स्थापित हैं। यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद देश में अपना नाम स्थापित करते हुए मनोज कुमार मिश्रा वर्तमान में भारतेंदु नाट्य अकादमी लखनऊ में सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। यहां आप अभिनय करने वाले छात्रों के साथ शिल्प से संबंधित विषयों पर प्रशिक्षण दे रहे हैं। मनोज मिश्रा ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया है। इन्होंने यह पुरस्कार अपने पिता स्व.चंद्रिका प्रसाद मिश्रा और माता श्रीमती चंद्रकांत मिश्रा को समर्पित किया है।