आखिर कब होगी सरकारी रतहरी तालाब भू-माफियों के खिलाफ कार्यवाही

Rewa News: म.प्र.के सफेद शेरों की धरती कही जाने वाली रीवा की सर्जमी पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का आगवन इस बार 24 अप्रैल 2023 को हो रहा है उसे पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री तमाम भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की बात कही है लेकिन क्या रीवा जिले की पवित्र नगरी को भ्रष्टाचार की आग में झोंकने वाले स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं जिला प्रशासन के भ्रष्टाचार से सने हाथों से प्रधानमंत्री का स्वागत कैसे कर पायेंगे,जहां उक्त जनप्रतिनिधि एवं समय समय पर आने वाले जिला कलेक्टर एवं नगर निगम आयुक्त द्वारा भ्रष्टाचार की ऐसी मखमली चादर बिछाई गई है कि उसके परत को हटा पाना बहुत मुश्किल है प्रदेश के मुख्यमंत्री का रीवा आगवन होता ही रहता है उनकी घोषणाएं केवल खोंखली होती हैं और उस पर अमल तो 0.01% भी नहीं होता है इस लिए वे केवल कोरी घोषणाएं करके भोपाल रवाना हो जातें हैं कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा घोषणा की गई है कि किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचारी,या माफियाओं को बक्शे नहीं जायेंगा,तो फिर वर्षों से जमे सरकारी रतहरी तालाब रीवा के भू-माफियाओं के ऊपर आखिर कार्यवाही क्यों नहीं हो रही है क्या भू-माफियाओं को स्थानीय जनप्रतिनिधि (विधायक) का संरक्षण तो प्राप्त नहीं है जो शासन प्रशासन के सीने पर ही भ्रष्टाचार का झंड़ा गाड़ रखा है,वर्षों से सरकारी रतहरी तालाब के भू-माफियाओ के खिलाफ चल रही लड़ाई में स्थानीय जनप्रतिनिधि की कोई भी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई और न ही भू-माफियाओं को हटाने की कोई पहल की गयी चूंकि सरकार रतहरी तालाब में अवैध अतिक्रमणकारी खुद जाकर स्थानीय जनप्रतिनिधि से कहते हैं कि आप रतहरी तालाब का अवैध अतिक्रमण हटाने की पहल ही नहीं करियेगा ये आपके परंपरागत वोट हैं और यही कारण रहा कि इस बार के महापौर के चुनाव में भ्रष्टाचार से ऊव चुकी जनता ने दबे पांव भाजपा के गढ़ में ही भाजपा को धूल चटाकर उनकी औकात बता दी है आने वाले विधानसभा चुनाव में भी वही प्रक्रिया दोहराई जावेगी तब भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वालों को पता चलेगा कि रीवा की जनता भ्रष्टचारियों को अब पसंद नहीं करेगी,तमाम आने वाले जिला कलेक्टर नगर निगम आयुक्त भू-माफियाओं के मित्र बन जाते हैं उनके ही इशारें पर काम करतें हैं इस लिए आज तक सरकारी रतहरी तालाब का अवैध अतिक्रमण नहीं हटा पाया है मुख्यमंत्री की हर घोषणा केवल कागजों तक सिमट कर रह गई है।