विश्व रंगमंच दिवस: डाइट रीवा पहुंचा "डाकघर"

World Theater Day : डाइट, रीवा में नाटक डाकघर का मंचन हुआ। मण्डप सांस्कृतिक शिक्षा कला केंद्र रीवा के कलाकारों के द्वारा दी गई जानदार प्रस्तुति

विश्व रंगमंच दिवस: डाइट रीवा पहुंचा "डाकघर"
नाटक डाकघर का दृश्य

World Theater Day : 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर डाइट, रीवा में नाटक डाकघर का मंचन हुआ। मण्डप सांस्कृतिक शिक्षा कला केंद्र रीवा के कलाकारों के द्वारा दी गई जानदार प्रस्तुति। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की इस कृति का निर्देशन मनोज कुमार मिश्रा ने किया है । नाटक डाक घर का मंचन दोपहर 1 बजे से डाइट रीवा में हुआ। निर्देशक मनोज मिश्रा ने नाटक को भारतीय विदूषकीय शैली मे प्रस्तुत किया है। प्रस्तुति के दौरान डाइट महाविद्यालय के प्राचार्य, श्री श्यामनारायण शर्मा, श्री अनिल सिंह तिवारी तथा समस्त शिक्षक एवं विद्यार्थियों सहित सुधिदर्शक उपस्थित रहे।

डाकघर मुख्यत: ग्रामीण परिवेश पर आधारित इस नाटक की कहानी एक बालक अमल के बीमार जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है। गुरुदेव टैगोर ने नाटक का शिल्प सांकेतिक लिखा है, नाटक की परिस्थितियों और नाटक के रूप को बदल कर निर्देशक ने नया प्रयोग किया हैं। प्रयोग के बाद भी इसका सांकेतिक रूप यथावत है ।  रंगों, बिम्बों, प्रतीकों, के साथ सामाजिक अवलोकन और संकेतों से बुनी प्रस्तुति का नाम है डाकघर । 


डाकघर-: कथा सार
नाटक का पात्र अमल लाइलाज बीमारी से ग्रस्त है। वैद्य के निर्देशानुसार लड़का अमल अपने कमरे के एकान्तवास तक सीमित रहता है। कमरे की खिड़की के पास से गुजरने वालों के साथ अमल बातचीत करता है। निर्देशक डाकघर की काव्यात्मक निर्माण प्रक्रिया को अंकित करते है। डाकघर मुख्यत: द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भारत में चिकित्सक व चिकित्सा प्रणाली के अभाव को दर्शाता है। साथ ही भारतीय दशा पर सोचने को मजबूर करता है। 


छोटी-छोटी बीमारियों से हो रही बच्चों की मौतों को याद कर,  यह मार्मिक प्रस्तुति दर्शकों को अपनी दशा पर सोचने को मजबूर करती हैं। नाटक में मौत के दरवाजे पर खड़ा, गंभीर रूप से बीमार अमल एक बंद कमरे में फंसा रहता है। जब तक एक राजवैद्य राजा का पत्र उसके पास लेकर नहीं पहुंचता। नाटक "डाक घर"  के माध्यम से बालमन और बाल हठ को बड़े रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है । बालक अमल की समझ को लोग भले नासमझ समझते हैं,किन्तु वह बड़ी और शिक्षाप्रद बातें बहुत सहजता से कहता है । जिसे समझने के बाद दर्शक वर्तमान समय की आपाधापी से खुद के लिए समय निकालने हेतु चिंतित दिखते हैं । अमन के चरित्र ने यह भी बताया कि कोई काम छोटा या बड़ा नही होता । अपने व्यवसाय से अपने कार्य से लगाव होना चाहिए । अन्य के कार्य के प्रति संवेदनशील भी होना चाहिए । 
प्राचार्य डाइट रीवा ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह नाट्य प्रस्तुति शिक्षाप्रद है । कलाकरों ने अपने अभिनय से इतना बड़ा सन्देश सहजता के साथ प्रस्तुत किया है । विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर आप सभी को शुभकामनाएं । 
नाट्य प्रस्तुति के बाद डाइट रीवा के प्राचार्य एवं वही पदस्थ प्रशिक्षक अनिल सिंह तिवारी को मण्डप आर्ट की ओर से  स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया । 
पात्र परिचय-:
मंच पर-: माधव दत्त/ दही वाला - सत्यम क्षेत्री, वैद्य/ पहरेदार - राजमणि तिवारी भोला, दादा/ फकीर - विपुल सिंह गहरवार,अमल - विनोद कुमार मिश्रा, सुधा चौधरी- प्रियांशु सेन ने अभिनय किया साथ ही पार्श्व मंच में मंच व्यवस्थापक- राजमणि तिवारी, विपुल सिंह, संगीत संचालन- प्रसून मिश्रा, अजय सेन, प्रकाश संचालन- प्रसून मिश्रा, रूप सज्जा- सुधीर सिंह, राज कुमार कोरी, सत्यम क्षेत्री, मंच सामग्री - सुधीर सिंह, प्रियांशु सेन, श्रुति द्विवेदी,दिया मिश्रा, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की रचना की  प्रस्तुति- मंडप संस्कृतिक शिक्षा कला केंद्र रीवा की थी।
मण्डप सांस्कृतिक शिक्षा कला केंद्र की अध्यक्ष चंद्रकांता मिश्र ने बताया कि रीवा के रंगमंच को समृद्ध करते हुए नवीन कीर्तिमानों को रचने में सहयोगी संस्था के रूप मे रावेन्द्र प्रताप सिंह शिक्षा सांस्कृतिक समिति, आर्ट पॉइंट रीवा, और रंग अनुभव सांस्कृतिक शिक्षा कला केंद्र आदि ने विशेष सहयोग दिया । आगे भी संस्था बेहतर आयोजन लेकर आएगी ।